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Birth Certificate

सम्बन्धित रजिस्ट्रार से मृत्य प्रमाण पत्र पर पुनः ई-साईन करवाये।

यदि पंजीयन के समय मोबाईल नम्बर नही दिया गया है तो रजिस्ट्रार से सम्पर्क कर जन्म मृत्यु एवं विवाह प्रमाण पत्र में मोबाईल नम्बर अपडेट करवायें।

जन्म/मृत्यु दिनांक से 30 दिवस के भीतर जन्म/मृत्यु का पंजीयन नही होने पर अनुज्ञा/शपथ पत्र की आवश्यकता होती हैं।

सम्बन्धित निजी अस्पताल के क्षेत्र में लगने वाले रजिस्ट्रार के द्वारा संशोधन किया जाता है।

निजी अस्पताल के क्षेत्र में लगने वाले रजिस्ट्रार से जन्म पंजीयन करवा कर प्राप्त करें। पंजीकृत होने पर पहचान पोर्टल के माध्यम से डाउनलोड किया जा सकता है।

सम्बन्धित रजिस्ट्रार कार्यालय से अथवा पहचान पोर्टल पर प्रमाण पत्र में मोबाईल न. पर प्राप्त OTP से डाउनलोड करके प्राप्त किया जा सकता है।

राजस्थान सरकार की सरकारी मुद्रणालय से गजट नोटिफिकेशन करवाये जाने के पश्चात नोटिफिकेशन की प्रति एवं पुराना मूल प्रमाण पत्र रजिस्ट्रार को प्रस्तुत करके नाम परिवर्तन करवाया जा सकता है।

परिवार का जनआधार नामाकंन करवाकर आवेदन करें।

हाँ, राजस्थान राज्य के निवासियों के लिए जन आधार कार्ड आवश्यक है। विशेष परिस्थिति में जनाधार कार्ड में छूट का प्रावधान है।

सम्बन्धित रजिस्ट्रार से सम्पर्क कर जन्म प्रमाण पत्र पर पुनः ई-साइन करवायें।

यदि पंजीयन के समय मोबाईल नम्बर नही दिए गये है तो रजिस्ट्रार से सम्पर्क कर जन्म मृत्यु एवं विवाह प्रमाण पत्र में मोबाईल नम्बर अपडेट करवायें।

जन्म प्रमाण पत्र जिस रजिस्ट्रार कार्यालय से जारी किया गया है वहा के रजिस्ट्रार को आवेदन करके नाम जुड़वाया जा सकता है।
प्रश्नवाचक चिन्ह पर  Right Click करके Validate Signature  करना चाहिए।
साइन PDF को Adobe Reader मे खोलें। ई-साइन/डिजिटल साइन पर Right Click  करें। फिर Signature Validate कर,Trust में जाकर सभी विकल्प को Check करें। PDF को बंद कर दुबारा खोले। इस प्रक्रिया को सिस्टम पर एक साइन के लिए केवल एक बार ही करना है।
उप रजिस्ट्रार जन्म दिनांक से 21 दिवस तक जन्म प्रमाण पत्र जारी कर सकता है।
प्रमाण पत्र प्रिंट करने से पहले रजिस्ट्रार, पंजीकरण को स्वतः ही संशोधन कर सकता है। पंजीकरण को एक बार प्रिंट करने के पश्चात उसमें परिवर्तन नही किया जा सकता है। ऐसी स्थिति मे रजिस्ट्रार संशोधन की रिक्वेस्ट भेज सकता है। जिले में पदस्थापित जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु ) एवं संयुक्त निदेशक / उप निदेशक, सांख्यिकी विभाग के द्वारा रिक्वेस्ट स्वीकृत होने के पश्चात रजिस्ट्रार उस पंजीकरण में संशोधन कर सकते हैं व उप रजिस्ट्रार द्वारा केवल प्रमाण पत्र का इंद्राज किया जा सकता है एवं प्रिंट करने से पहले संशोधन किये जा सकते है। प्रिंट करने के पश्चात उप रजिस्ट्रार के संशोधन की रिक्वेस्ट उसके रजिस्ट्रार द्वारा भेजी जा सकती है।
पंजीकरण का इंद्राज हिन्दी अथवा अंग्रेजी या दोनो भाषाओं में किया जा सकता है। किसी भी एक भाषा में पूरा इंद्राज करना आवश्यक है। किसी भी एक भाषा में इंद्राज पंजीकरण में दूसरी भाषा जोड़ने का विकल्प पोर्टल पर पृथक से उपलब्ध है।
जुड़वाँ बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र के लिये पहचान पोर्टल पर आवेदन प्रथम बच्चे के लिए सामान्य प्रक्रिया से करें एवं दूसरे बच्चे का जुडवाँ के विकल्प पर क्लिक कर इन्द्राज करें।
जन्म प्रमाण पत्र में पहचान पोर्टल के माध्यम से एक वर्ष तक निःशुल्क बच्चे का नाम जोड़ने हेतु प्रार्थी स्वयं आमजन विकल्प या ई-मित्र से रजिस्ट्रार को आवेदन करके नाम जुड़वा सकते है।
जन्म प्रमाण पत्र में बच्चे के नाम में उपनाम (सरनेम) शपथ पत्र एवं दस्तावेजों के आधार पर जुडवा सकते हैं।
जन्म प्रमाण पत्र मे बच्चे का नाम जुडवाने हेतु आवेदन पत्र के साथ जन्म प्रमाण पत्र, माता/पिता का आधार और जनाधार कार्ड की आवश्यकता होती है।
जन्म प्रमाण पत्र जहाँ से जारी किया गया है वहाँ के संबंधित रजिस्ट्रार से संपर्क करके माता-पिता का आधार जुड़वाया जा सकता है।
सामान्यतः विवाहित माता-पिता के  बच्चे का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है, उसी प्रक्रिया के आधार पर किया जावेगा केवल बच्चे के प्रमाण पत्र में पिता/माता का नाम रिक्त रखा जावेगा
जन्म प्रमाण पत्र हिन्दी भाषा में होने पर हिन्दी भाषा (मंगल फोन्ट) में, अग्रेजी भाषा में होने पर अग्रेजी भाषा में तथा हिन्दी/अग्रेजी दोनो भाषा में होने पर दोनो भाषा में दर्ज करें। 
आवेदक के स्वयं द्वारा प्रस्तुत दो प्रति में शपथ पत्र के साथ फोटो।
आवेदक की एक पहचान सम्बन्धी दस्तावेज (आधार कार्ड, पहचान पत्र, लाइसेंन्स व अन्य दस्तावेज) ।
माता-पिता का आधार कार्ड तथा आधार कार्ड नही होने की स्थिति में अन्य पहचान सम्बन्धी दस्तावेज आवश्यक है।
गवाहों के शपथ पत्र व उनकी पहचान सम्बन्धी दस्तावेज।

जन्म के 30 दिवस से 1 वर्ष के भीतर ग्रामीण क्षेत्र मे सम्बंधित क्षेत्र के ब्लॉक नोडल अधिकारी (जन्म-मृत्यु) एवं शहरी क्षेत्र में जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) के द्वारा जारी की जाती हैं जन्म के 1 वर्ष के पश्चात ग्रामीण/शहरी क्षेत्र मे सम्बंधित क्षेत्र के कार्यपालक मजिस्ट्रेट (जिला कलेक्टर, उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार) के द्वारा जारी की जाती हैं।

  • घर पर जन्म होने की स्थिति में उस क्षे़त्र का रजिस्ट्रार (नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका/ग्राम पंचायत) आदि।
  • राजकीय अस्पताल में जन्म होने पर सम्बन्धित अस्पताल का प्रभारी अधिकारी (उप रजिस्ट्रार)।
  • निजी अस्पताल में जन्म होने कि स्थिति में जिस क्षेत्र में निजी अस्पताल स्थित है उस क्षे़त्र का रजिस्ट्रार (नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका/ग्राम पंचायत) आदि।
हां न्यायालय द्वारा गोद प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरान्त बच्चे के माता-पिता के नाम में परिवर्तन किया जा सकता है अथवा नये माता-पिता के नाम से अधिनियम के प्रावधानों एवं प्रक्रिया अनुसार जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।

जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 की धारा 20(2)-॥ के तहत ऐसे बालक जिसका जन्म भारत के बाहर हुआ है एवं उसके माता-पिता बालक के जन्म का भारत में रजिस्ट्रीकरण कराना चाहते है और इस इरादे से आए हो कि उन्हें अब भारत में ही रहना है तो वे भारत आने कि तिथि से 60 दिन के अन्दर जन्म का रजिस्ट्रीकरण करवा सकते है, यदि 60 दिन में रजिस्ट्रीकरण नहीं करवाया गया है तो विलम्ब से पंजीयन की सामान्य प्रक्रिया एवं प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही की जाकर रजिस्ट्रीकरण करवाया जा सकेगा।

जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करना बच्चे का प्रथम अधिकार है एवं यह उसकी पहचान इंगित करता है । जन्म प्रमाण पत्र के निम्न लिखित लाभ/उपयोग है :-
  • विद्यालय में प्रवेश
  • रोजगार पाने हेतु आयु का प्रमाण
  • विवाह हेतु आयु का प्रमाण
  • अभिभावक की पहचान
  • मतदाता सूची में नाम जुड़वाने हेतु 
  • पासपोर्ट पाने हेतु   
  • राशन कार्ड में नाम दर्ज करवने हेतु
  • ड्राईविंग लाईसेन्स बनवाने हेतु
  • बीमा पॉलिसी प्राप्त करने हेतु
  • आधार कार्ड बनवाने हेतु 
  • भामाशाह कार्ड में नाम जुडवाने हेतु

जी हॉ, बच्चे का बिना नाम का जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है। बच्चे के माता-पिता या संरक्षक द्वारा रजिस्ट्रार को लिखित या मौखिक इत्तिला देने पर जन्म के रजिस्ट्रीकरण की दिनांक से 1 वर्ष तक नि:शुल्क एवं उसके पश्चात् 15 वर्ष की अवधि के भीतर रूपये 5/- का शुल्क देकर नाम जुड़वाया जा सकता है एवं नया प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है, 15 वर्ष के पश्चात् नाम जुड़वाने का अधिनियम में प्रावधान नहीं है।

Death Certificate

गुमशुदा व्यक्ति के संबंध में जहाँ उसकी मृत्यु की वास्तविक दिनांक व स्थान अनिश्चित होने पर बर्डन ऑफ प्रूफ प्रमाणों पर आधारित होगा। एसे प्रकरणों में दायर किये गये घोषणात्मक वाद में न्यायालय द्वारा निर्धारित दिनांक व स्थान पर निर्भर होता है।
वह स्थान जहा पर मृत्यु होना घोषित होती है अगर स्थान निर्धारण ना हो पाये उस स्थिति में दाह/अन्तिम संस्कार वाले स्थान के रजिस्ट्रार द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जायेगा।
सम्बन्धित रजिस्ट्रार से मृत्य प्रमाण पत्र पर पुनः ई-साईन करवायें।
विशेष परिस्थतियों में मृतक का आधार कार्ड उपलब्ध नही होने पर आवेदक के आधार कार्ड के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र बनाया जा सकता है।
मृतक राजस्थान राज्य का एवं बाहरी राज्य का नागरिक होने पर जन आधार कार्ड की शिथिलता प्रदान कर मृत्यु की घटना का पंजीयन किया जाता है।
  • आवेदक का स्वयं द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र (दो प्रति) के साथ स्वयं की फोटो।
  • आवेदक की एक पहचान सम्बन्धी दस्तावेज (आधार कार्ड, पहचान पत्र, लाइसेंन्स व अन्य दस्तावेज) ।
  • मृतक का आधार कार्ड नही होने की स्थिति में अन्य पहचान सम्बन्धी दस्तावेज आवश्यक है।
  • गवाहों के शपथ पत्र व उनकी पहचान सम्बन्धी दस्तावेज।
नही, करवाया जा सकता है। क्योंकि जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के नियमानुसार घटना जिस क्षेत्र में घटित हुई है उस क्षेत्र के जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार के द्वारा पंजीयन किया जावेगा।
दुर्घटना में यदि दुर्घटना स्थल पर ही मृत्यु हो जाती है तो दुर्घटना स्थल क्षेत्र में लगने वाले जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार द्वारा जारी किया जाता है। दुर्घटना स्थल से अस्पताल में ले जाने पर यदि मृत्यु सरकारी अस्पताल में होती है तो उसी सरकारी अस्पताल के उप रजिस्ट्रार द्वारा जारी किया जायेगा व मृत्यु निजी अस्पताल में होने पर उस क्षेत्र में लगने वाले नगर निगम/नगर परिषद/नगरपालिका/गाम पंचायत द्वारा जारी किया जायेगा।
सामान्यतया 7 वर्ष तक किसी व्यक्ति के बारे में कुछ भी पता नही चले एवं सक्षम न्यायालय/प्राधिकारी के मृतक घोषित करने पर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया जा सकता है।
हाँ, सम्बधित रजिस्ट्रार द्वारा जिला रजिस्ट्रार के अनुमोदन पश्चात आवेदन  के समय प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र में लिपिकीय त्रुटि का शुद्विकरण किया जा सकता है ।
मृतक के दो भिन्न-भिन्न नाम होने पर वैधानिक दस्तावेजों के आधार पर मूल/प्रथम नाम के बाद उर्फ लगाकर द्वितीय नाम के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया जा सकता है।

मृतक का नाम, मृत्यु दिनांक, मृतक के माता-पिता का नाम एवं विवाहित होने कि स्थिति में मृतक की पत्नी का नाम आदि सूचनाओं का विशेष ध्यान रखकर ही मृत्यु प्रमाण पत्र में नाम दर्ज करवाना चाहिए।

  • घर पर मृत्यु होने की स्थिति में उस क्षे़त्र का रजिस्ट्रार (नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका/ग्राम पंचायत) आदि।
  • राजकीय अस्पताल में मृत्यु होने पर सम्बन्धित अस्पताल का प्रभारी अधिकारी (उप रजिस्ट्रार)।
  • निजी अस्पताल में मृत्यु होने कि स्थिति में जिस क्षेत्र में निजी अस्पताल स्थित है उस क्षे़त्र का रजिस्ट्रार (नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका/ग्राम पंचायत) आदि।

भारत में मृत्यु का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा जिस देश में मृत्यु हुयी है उस देश की ऐमबेसी द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जायेगा।

हॉं, पति/पत्नि का नाम दर्ज किया जा सकता है।

  • सम्पत्ति के उत्तराधिकार हेतु
  • पेंशन-बीमा के मामले निपटाने हेत
  • सम्पत्ति दावो को निपटाने के हेतु
  • भूमि रूपान्तरण के लिये
  • सामाजिक सुरक्षा की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिये

Marriage Certificate

विवाह पंजीयन के लिए आवश्यक दस्तावेजो सहित आवेदन सम्बन्धित रजिस्ट्रार कार्यालय में व पहचान पोर्टल पर ई-मित्र एवं आमजन के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
नहीं, विवाह सम्पन्न होने के पश्चात कभी भी विवाह का पंजीयन करवाया जा सकता है।
हॉ, विवाह अधिनियम 2009 से पूर्व सम्पन्न विवाहो का रजिस्ट्रेशन भी इस अधिनियम में किया जा सकता है।
हाँ, राजस्थान का निवासी होने पर अनिवार्य है एवं राज्य के बाहर का होने पर जनआधार कार्ड की शिथिलता प्रदान की जाती है।
हाँ, सभी धर्म समुदाय के लिए विवाह पंजीयन करवाया जाना जरूरी है।
वर या वधु में से किसी एक का राज्य से बाहर का निवासी होने पर भी राज्य में पंजीयन करवाया जा सकता हैं।
एक बार विवाह पंजीयन होने पर न्यायालय के आदेश पर ही निरस्तीकरण की कार्यवाही होती है।
हाँ, पहचान पोर्टल पर OTP के माध्यम से किया जा सकता है।
म्बन्धित रजिस्ट्रार से सम्पर्क कर विवाह प्रमाण पत्र पर पुनः ई-साइन करवायें।
सम्बन्धित रजिस्ट्रार से सम्पर्क कर विवाह प्रमाण पत्र पर ई-साइन करवायें।
हाँ, सम्बधित रजिस्ट्रार को पुराना प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर डिजिटली प्रमाण पत्र  बनवाया जा सकता है

हाँ, लिपिकीय त्रुटी होने पर विवाह पंजीयन अधिकारी को आवेदन के समय प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर जिला रजिस्ट्रार के अनुमोदन उपरांत संशोधन करवाया जा सकता है।

सक्षम न्यायालय द्वारा विवाह विच्छेद की डिक्री होने पर एवं वर वधू में से किसी एक की मृत्यु होने कि स्थिति में पुर्नःविवाह का पंजीयन किया जा सकता है।

नही, विशेष विवाह अधिनियम के अर्न्तगत पंजीकृत विवाह का पंजीयन करवाना अनिवार्य नही है।

आवेदक द्वारा आवेदन फार्म में वर-वधु का नाम जन्म दिनांक माता पिता का नाम, वर-वधु का पता एवं विवाह की दिनांक आदि सूचनाएँ आवेदन फार्म में बिना किसी त्रुटि के भरी जानी चाहिए।

हां, विवाह पंजीकरण हेतु 10/- रूपये फीस का प्रावधान है किन्तु 30 दिवस की अवधि व्यतीत होने के उपरान्त 100/- रूपये फीस जमा की जाती है।

जी हां, परंतु इसके लिए आवश्यक है कि मृतक पक्षकार के माता-पिता अथवा संरक्षक की ओर से विवाह निष्पादन के सम्बन्ध में शपथ पत्र प्रस्तुत किये जावें एवं विवाह पंजीयन के समय रजिस्ट्रार के सम्मुख उपस्थित रहें।

राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009 राजस्थान राज्य में सम्पन्न हुऐ विवाहों पर ही लागू होता है।

विवाह के पक्षकारों के नाबालिग होने की दशा में पंजीयन पर रोक नही है, किन्तु यदि वर या वधू या उनमे से कोई एक शादी के समय नाबालिग हो तो विवाह पंजीयन अधिकारी पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत विवाह पंजीयन हेतु प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच करने एवं संतुष्टि होने के पश्चात विवाह का पंजीयन कर सकेगा लेकिन साथ ही ऐसे पक्षकारों के मात-पिता/संरक्षक एवं अन्य के विरूद्ध बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत वांछित कार्यवाही करने हेतु जिला विवाह पंजीयन अधिकारी (जिला कलक्टर) को सूचित करेगा।

विवाह हेतु वर की आयु 21 वर्ष एवं वधू की 18 वर्ष होना आवश्यक है।

  • विवाह पंजीकरण हेतु आवेदन पत्र
  • दो गवाहों के शपथ पत्र नोटेरी से सत्यापित
  • वर-वधू का शपथ पत्र
  • वर-वधू का भूण हत्या न करने का शपथ पत्र
  • वर-वधू का आयु प्रमाण पत्र
  • वर-वधू एवं गवाहों के पहचान (आई.डी.) एवं पते के दस्तावेज
  • वर-वधू की पासपोर्ट साईज दो-दो फोटो एवं 5 X 3 सेमी की संयुक्त फोटो

हां विवाह पंजीकरण हेतु वर-वधू की उपस्थिति रजिस्ट्रार के समक्ष होना आवश्यक है।

हां यदि प्रार्थी चाहे तो पुराने विवाहों का पंजीकरण करवाकर प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।

राजस्थान में विवाहों का अनिवार्य पंजीकरण नियम, 2009 के तह्त किया जा रहा है।

  • विवाह का पंजीयन जहां विवाह सम्पन्न हुआ है, उससे सम्बन्धित क्षेत्र के रजिस्ट्रार के पास (ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत/शहरी क्षेत्र में नगर पालिका, नगर परिषद/नगर निगम) जाकर विवाह का पंजीयन करवाया जा सकता है।

      अथवा

  • विवाह का पंजीयन उस रजिस्ट्रार द्वारा भी किया जा सकता है, जहां पर वर-वधू आवेदन करने की दिनांक से कम से कम 30 दिवस पूर्व निवास कर रहे हो।